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इस फेस्टिवल में लोग एक दूसरे को लगाते है गाय का गोबर, बेहद खास है मान्यताएं

भारत की सच्ची खूबसूरती विविधता में हैं। विविधताओं की वजह से भारत दुनिया का सबसे अलग देश माना जाता है। भारत जैसी संस्कृति पूरी दुनिया में कहीं और नहीं मिलती है। यहां हर रंग के लोग रहते हैं, तो हर तरह के त्योहार भी बड़े चांव से मनाए जाते हैं। एक दूसरे के त्योहार में खुशी खुशी शामिल होना ही भारतीय परंपरा है, जिसकी नींव सदियों से टिकी हुई और मजबूत है। जी हां, इसी त्योहार के लिस्ट में एक गोरे हब्बा त्योहार शामिल है, जो कि तमिलनाडु में मनाया जाता है।

यूं तो भारत में कई त्योहार नेशनल लेवल पर मनाया जाता है, लेकिन कई त्योहार क्षेत्रीय लेवल पर भी मनाया जाता है। क्षेत्रीय लेवल के त्योहार में भी लोग खूब मस्ती करते हैं। ऐसे में आज हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु के गोरे हब्बा फेस्टिवल की, जोकि अपने आप में ही अनोखा है। लोग इस फेस्टिवल के बारे में जानने के लिए अक्सर उत्साहित रहते हैं। दरअसल, ये फेस्टिवल होली की तरह मिलता जुलता रहता है, लेकिन इस फेस्टिवल में रंगों का नहीं, बल्कि गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे जुड़ी कई मान्यताएं भी प्रचलित हैं।

गोबर वाली होली है ये

जिस उत्साह के साथ इस त्योहार को मनाया जाता है, उसे देखकर होली की याद आ जाती है। जी हां, इस त्योहार में लोग एक दूसरे को गाय का गोबर लगाते हैं, जिसकी वजह से इसे गोबर वाली होली के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि ये होली दिवाली के ठीक अगले दिन होती है, जिसमें लोग एक दूसरे को बड़े ही उत्साह से गोबर लगाते हैं और लगवाते हैं। कहा जाता है कि गाय का गोबर सभी रोगों को दूर करता है, जिसकी वजह से ये त्योहार मनाया जाता है, ताकि लोग निरोग रहें।

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क्या है मान्यताएँ?

गोरे हब्बा फेस्टिवल को लेकर मान्यताएं है कि इससे लोगों को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है, जिसकी वजह से वे बीमार नहीं पड़ते हैं। इतना ही नहीं, इस फेस्टिवल को लेकर गांव वालों का कहना है कि इससे हम लोग बीमार नहीं पड़ते हैं, क्योंकि गाय का गोबर औषधि का काम करता है और ये फेस्टिवल सदियों से चला आ रहा है, जिसे हर लोग बड़े ही चांव से मनाते हैं। इसके अलावा इसका धार्मिक महत्व भी है कि ये लोग गाय को सम्मान देते हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर इस तरह के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं।

समानता को बढ़ावा देती है ये फेस्टिवल

कहा जाता है कि इस फेस्टिवल में सभी धर्म और जाति के लोग हिस्सा लेते हैं, जिससे ये समानता का त्योहार माना जाता है। इससे लोगों के बीच भाईचारा बढ़ता है और आपस में प्यार मोहब्बत। बता दें कि इस त्योहार में हर कोई बड़े ही चांव से हिस्सा लेता है। इस तरह के कई क्षेत्रीय त्योहार हमारे देश में मौजूद हैं, जोकि हमारी संस्कृति को दिन ब दिन और खूबसूरत कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत विविधताओं का देश हैं, जहां आपको सबकुछ मिलेगा।

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